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Wednesday, March 14, 2012

बदल गई है श्रीमद्भागवत गीता नीति...

आजकल हमारे कुछ धर्माचार्यों ने धर्म की परिभाषा ही बदल दी है क्योकि ये सर्वधर्म समभाव, वसुधैवकुटुम्बकम, क्षमा वीरस्य भूषणम् और अव्यवहारिक अहिंसा तथा अतिसहिष्णुता जैसे सतयुगी उपदेश देते हैं. बड़ी बेशर्मी के साथ सर्वे भवन्तु सुखिनः हमारा नारा है का उपदेश देते हैं. ऐसे पाखंड़ी लोग झूठे लोगों द्वारा लिखे गये साहित्य व अव्यवहारिक कहानियां सुनाकर हिन्दुओं को भ्रमित करते हैं.
बड़े ही आत्मविश्वास के साथ बोलते हैं कि हिन्दु धर्म की रक्षा के लिये भगवान अवतार लेंगे. फ़िर इन्हे भगवान के अवतारों की कहानियां सुनाकर अपनी बात को सत्य सिद्ध करते हैं.
इन महानुभावों से प्रश्न है कि इन्हें केवल भगवान के अवतार ही क्यों नजर आते हैं? ये धर्मावलम्बी क्यों नही समझाते की भगवान ने केवल राक्षसों का संहार करने के लिये ही नही अपितु उन्होने समाज को यह संदेश देने के लिये कि - उनसे प्रेरणा पाकर लोग स्वयं उठ खड़े होना, अपना धर्म समझे और देवी-देवताओं द्वारा धारण किये गये हथियारों से प्रेरणा पाकर लोग खुद शक्तिशाली बने. लेकिन कुछ कायरों ने इसका अर्थ यह दे दिया कि जब भी अत्याचारी अत्याचार करेंगे तो तुम्हारी रक्षा के लिये भगवान अवतार लेंगे.
इसीलिये कठिनाईयों और खतरों का सामना करने के स्थान पर हिन्दु चमत्कारों की प्रतिक्षा में देवी-देवताओं के सहारे बैठे रहते हैं परन्तु हिन्दुओं को समझ लेना चाहिये की कलियुग में अवतार नही होते. अपनी तथा अपनी सन्तानों के भविष्य और अपने धर्म की रक्षा स्वयं हिन्दुओं को ही करनी होगी. भगवान उसी की रक्षा करते हैं, जो खुद अपनी रक्षा का पूरा प्रयास करते हैं क्यों तुम्हे भगवान के अवतार ही नजर आते हैं हर अवतार में धारण किये गये उनके हथियार क्यों नही दिखते. बस जिससे कायरता छिप सके वही चीज़ दिखती है शूरवीरों की बातें नही दिखती. गीता का सिर्फ़ यही संदेश ही जीवन मे उतारा कि हिन्दु धर्म की रक्षा के लिये भगवान अवतार लेंगे लेकिन यह क्यों दिखा कि भगवान ने स्वयं बोला है कि केवल ईश्वर अथवा भाग्य के सहारे बैठ कर अकर्मण्यता मतकर. अत्याचारियों से मुकाबला किये बिना तू अत्याचार से बच नही सकता. इसलिये तू सदैव ईश्वर का स्मरण करते हुये युद्ध भी कर. (कर्म कर).
लेकिन हम हिन्दुओं ने भगवान के इस आदेश को नही माना और अत्याचारों का मुकाबला करने के स्थान पर अत्याचारों को सहना ही अपना धर्म बना लिया. इसी अव्यवहारिक अहिंसा और अतिसहनशीलता या अतिसहिष्णुता को हमारी कमजोरी व डरपोकपन समझकर हम पर और अत्याचार किये गये. गीता मे भगवान ऐसी अहिंसा व सहिष्णुता को नपुसंकता कहकर उससे दूर रहने को कहते हैं. सहिष्णुता और अहिंसा का अर्थ यह नही कि अपनी गरदने कटवाने की रुपरेखा खुद तैयार की जाये और प्रेम पूर्वक गुलाम बन जाया जाये तथा इस अहिंसा और सहिष्णुता के नाम पर अत्याचारियों को अपने ऊपर अत्याचार करने की खुली छूट दे दी जाये. अत्याचारों और अत्याचारियों की अनदेखी करना हिंसा को बढ़ावा देना है, जो अहिंसा न होकर सबसे बड़ी हिंसा है, पाप है.
इसलिये भूल जाओ ऐसी अव्यवहारिक अहिंसा को मिटा दो अतिसहिष्णुता रुपी नपुसंकता को क्योकि आत्मरक्षा और आत्मसम्मान ही सबसे बड़ा धर्म है. यह पृथ्वी कर्म-भूमि है. यहां रहने वाले मनुष्य को अंतिम समय तक धर्म और समाज के प्रति संवेदनशील और कर्मशील रहना चाहिया. यही श्रीमद्भागवत में श्रीकृष्ण का आदेश है. यही ऋषि-मुनियों की शिक्षा है.
यह गाल पिटे वह गाल बढ़ाओ, यह तो आर्यो की नीति नही
अन्यायी से प्रेम अहिंसा यह तो गीता की निति नही
हे राम बचाओ जो कहता है, वह कायर है खुद अपना हत्यारा है.
जो करे वीरता अति साहस वही राम का प्यारा है.

Wednesday, March 7, 2012

मुझ पर हंसने वालों एक दिन दुनिया तुम पर हंसेगी.....!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

मेरे फ़ेल होने का जश्न मनाने वालों जीते तुम भी नही हो. इसलिये मुझ पर हंसने से पहले तुम्हें मुलायम राज का शोक मनाना चाहिये और आत्म मंथन करना चाहिये कि जिस मुलायम के शासन काल में बलात्कार, रंगदारी, अवैध वसूली, अपहरण, आतंकवाद को संरक्षण देना चर्मोत्कर्ष पर था, उसी गुण्ड़ाराज को उत्तर-प्रदेश की जनता ने दुबारा क्यों चुना???? क्या वजह है कि मायावती अपनी हार की वजह मुसलिम मतदाताओं को मान रही हैं.
सोचिये कही सचमुच ऐसा तो नही है कि मुसलिम जिसे जिताना चाहे उसे जिता सकते हैं और अगर ऐसा है तो वह अगर अपने मोहरे (मुलायम) को सत्ता के सिंहासन पर बैठा सकते हैं. तो अपने मुल्ला नेता को क्यों नही????? सोचिये अगर वह यू.पी. मे अपनी ताकत के बल पर सरकार बना सकते हैं तो वह दिन भी दूर नही जब अधिकतर लोकसभा क्षेत्रों से मुसलमान उम्मीदवार चुनाव जीतकर दिल्ली में मुल्लावादी सरकार बना देंगे. उसके बाद इस भारतीय सविधान की जगह कुरान का कानून जिसे शरियत का कानून कहते हैं लागू होगा. तब हिन्दुओं की धन-दौलत, फ़ैक्ट्री, व्यापार, खेत और मकान, हिन्दुओं द्वारा बनवाये गये स्कूल, अस्पताल, धर्मशाला और मंदिर आदि पर मुसलमानों का कब्जा होगा. फ़िर कुरान के आदेशानुसार काफ़िर हिन्दुओं के कत्लेआम के साथ उनकी लड़कियों व औरतों को पकड़कर मुसलमान बनाने का सिलसिला शुरु होगा. प्रत्यक्ष रुप से माना जाये तो फ़िर से मुगल सल्तनत शुरु हो जायेगी.
सोचिये... जिस दिन मुसलमान अपने वोट के बल पर शासन में आ गये तो वह वैध तरीके से भारत की सत्ता पर सदैव के लिये कब्जा जमा लेंगे. तब हिन्दु, मुल्ला गुलामी से कभी बाहर नही निकल पायेगा और अबकि उन्हें कोई अंग्रेज भी बचाने नही आयेगा (अंग्रेजो का नाम लेने का यह मतलब नही कि अंग्रेजों की गुलामी सही थी परन्तु उनकी गुलामी मुसलिम गुलामी से सभ्य थी) क्योकि वे वैध तरीके से भारत की सत्ता हासिल करेंगे.
इतिहास इस बात का गवाह है कि हिंसावादी कट्टर मुसलमानों के हाथों में जब-जब भारत का राज आया है उन्होंने हिन्दुओं को मारा, काटा, लूटा और अपमानित किया तथा उनकी औरतों और लड़कियों को छीना. तलवार के जोर पर आतंक फ़ैला कर अपने धर्म का विस्तार किया. हिन्दुओं को नरक से भी ज्यादा कष्टप्रद जीवन जीने को मजबूर किया.
अब बहुत से बुद्धिजीवी यह कह सकते हैं कि यह सब पुरानी बातें है आज से इन बातों का कोई सरोकार नही है तो यह बुद्धिजीवी कृप्या मुसलिम बहुल इलाकों की तरफ़ देखें की खतरे की घण्टी बज चुकी है जहाँ पर भी मुसलिमों का दबदबा है. वहा पर हिन्दु पूजा पद्धतियों पर रोक टोक शुरु हो चुकी है. कुछ दिनों पहले ग्वालियर में एक स्थान पर राम कथा शुरू होनी थी .... पर SDM ने इसलिए अनुमति नहीं दी क्योकि कुछ मुस्लिमो ने आरोप लगाया था की हिन्दू शोर बहुत करते ... तब स्थान बदलने पर ही कथा पूर्ण हो पाई .... विदित हो की उसी मैदान में कुछ दिनों पहले कव्वालियों का प्रोग्राम हुआ था ...
उससे पहले की भी एक घटना जिसे धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मीडिया ने दिखाना उचित नही समझा कि हैदराबाद में भी मंदिर में घंटिया बजाने पर रोक लगाने का प्रयास किया गया.
सोचिये जब पूर्ण बहुतमत से मुस्लिम सत्ता हासिल करेंगे तब हिन्दुस्तान में हिन्दुओं का क्या हर्ष होगा.
इसलिये सभी हिन्दु मित्रों से अनुरोध है कि हिन्दुस्तान पर मंड़राते हुये इस भयानक खतरे को पहचानों और अगर अपना जीवन, अपना धन, अपना धर्म और अपनी नारियों को बचाना है तो आज और अभी सौगन्ध खाकर प्रतिज्ञा करो कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक, कच्छ से लेकर आसाम तक हम एक हैं.. न ब्राह्मण हैं न क्षत्रिय हैं, न वैश्य हैं ना शूद्र हैं. हम केवल हिन्दु हैं. इस तरह एक विशाल हिन्दु वोट बनायेंगे. आज का सबसे बड़ा पुण्य कार्य यही है. यह आत्म रक्षा का धर्म है.
नही तो वह दिन दूर नही जब दुनिया हिन्दुओं की बेवकूफ़ी पर हंसेगी....
जय श्रीराम....

Tuesday, March 6, 2012

सम्मान बचाने के लिये आत्महत्या !!!!!!!!!!

आज एक मित्र से आत्महत्या के बारे में चर्चा करते हुये विश्वनाथ प्रताप सिंह का शासन काल याद आ गया कि किस तरह मंडल आयोग की सिपारिश लागू करने के कारण जिसमे २७% आरक्षण लागू कर दिया गया था के विरोध में हिन्दु नौजवानों ने महान कायरता और नपुसंकता का प्रदर्शन करते हुये खुद को आग में जलाना (आत्मदाह) शुरु कर दिया था. नौजवानों मे आत्मदाह कर अपने को जिन्दा जला ड़ालने की होड़ मची हुई थी. यह सब करके हिन्दु नौजवानों ने इतिहास को दोहरा दिया कि इनसे बड़ा कायर नपुसंक इस दुनिया में कोई माई का लाल नही है. यह कोई पहला मौका नही था कि जब हिन्दुओं ने मुकाबला करने के स्थान पर आत्महत्या की हो.
सन् 1000 में जब हिन्दु राजा जयपाल महमूद गजनवी से परास्त हुआ तो पुनः महमूद से बदला लेने के स्थान पर वह जिन्दा ही चिता में जलकर मर गया. सन् 1003 में भेरा के राय को जब महमूद गजनवी ने हराया तो पुनः मुकाबला करके बदला लेने के स्थान पर वह भी आत्महत्या करके मर गया. सन् 1527 में बाबर ने जब चन्देरी पर हमला किया तो चन्देरी के राजा मोदिनीराय तथा उसके अन्य सहयोगी राजपूतों ने अपनी स्त्रियों और बच्चों को जिन्दा जला दिया और खुद निहत्थे तथा नंगे होकर किले के बाहर दौड़ पड़े. जिससे वह रणक्षेत्र में मरकर स्वर्ग जा सकें. वीरता से युद्ध करने के स्थान पर, दुश्मन के हाथों केवल मर कर स्वर्ग जाने की इच्छा रखने वाले उन राजपूतों के सिर धड़ से अलग करवा दिये. काटे गये सिरों को चन्देरी की पहाड़ी पर एक के ऊपर एक रखकर इन सिरों का विशाल गुम्बद बनवाया. इस तरह अपनी विजय का जश्न मनाकर, उनको सड़ने और चील कौवों के खाने के लिये छोड़कर दिल्ली वापस लौट गया.
मौहम्मद शहाबुद्दीन गौरी ने सन् 1192 में पृथ्वीराज चौहान को हराकर बाद में उसकी हत्या कर दी. पृथ्वीराज की मौत का बदला लेने के लिये पृथ्वीराज के छोटे भाई हरिराज ने सेना इकठ्ठी की और सन् 1195 में दिल्ली में हमला कर दिया. मोहम्मद गोरी के सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने इस सेना को मार भगाया तथा उसका पीछा करते हुये अजमेर आ गया और अजमेर के किले को घेर लिया. इस किले के अन्दर बैठे हरिराज ने कुतुबुद्दीन का मुकाबला करने के स्थान पर आग लगाकर आत्महत्या कर ली.
जिसे इन मूर्ख राजाओं ने आत्मसम्मान की मौत का रास्ता माना परन्तु यह गीता के सिद्धांतो के एकदम विपरीत था क्योकि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता मे स्पष्ट कहा है कि अत्याचारियों का मुकाबला किये बिना, उनके द्वारा मर जाना, स्वर्ग का रास्ता ना होकर, नरक का रास्ता है. स्वर्ग तो वीरता से मुकाबला करने वाले वीरों के लिये है.
अन्याय के विरुद्ध इन अत्याचारियों से युद्ध करते हुये तू यदि मारा जायेगा, तो स्वर्ग को प्राप्त करेगा अथवा विजयी होकर इस पृथ्वी का भोग करने के उपरान्त स्वर्ग को प्राप्त होगा.
किन्तु यदि तू इस धर्म युद्ध को नही करेगा तो अपने धर्म और यश को खोकर पाप को प्राप्त होगा. इसलिये तू उठ ! शत्रुओं का विनाश कर, यश को प्राप्त कर धन-धान्य से पूर्ण राज्य का भोग कर.
यह अच्छी तरह समझ लो की ड़रपोक और कायरों का भगवान भी साथ नही देते. भगवान भी उन्हीं का ही साथ देते हैं जो अपनी रक्षा के लिये स्वयं आगे बढ़ते हैं.
इसलिये भूल जाओं अव्यवहारिक अहिंसा को और मिटा दो अतिसहिष्णुता रुपी नपुसंकता को समझ लो कि कोई भी लड़ाई मर कर नही जीती जा सकती जी कर ही लड़ाई जीती जा सकती है क्योकि मरने के बाद तो लड़ाई स्वतः ही समाप्त हो जायेगी. इसलिये याद रखो-
यह गाल पिटे वह गाल बढ़ाओ, यह तो आर्यों की नीती नही.
अन्यायी से प्रेम अहिंसा, यह तो गीता की नीति नही.
हे राम बचाओ जो कहता है, वह कायर हे, खुद अपना हत्यारा है.
जो करे वीरता अति साहस, वही राम का प्यारा है.

Sunday, March 4, 2012

हिन्दु से बेशर्म कोई जाति नही.....

(हो सकता है मेरे शब्द लोगों को बुरे लगे पर गजनवी के बारे में पढ़कर खून जल रहा है कि हिन्दु कैसी कौम है जो कभी गलत का विरोध नही करती. क्यो भगवान और भाग्य के भरोसे बैठे रहते हैं हम. अगर कोई कहता है कि हिन्दुओं ने वीरता का कार्य किया था तो हम अपने यह शब्द वापिस लेकर क्षमा चाहते हैं.)
कुछ सालों पहले (शायद 2006 में) अभय भारत मासिक पात्रिका के संस्थापक व पूर्वी दिल्ली से भूतपूर्व लोकसभा सदस्य श्री बी.एल.शर्मा जी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था वह ओफ़िस में किसी मित्र को बता रहे थे कि वह बचपन में गजनी गये थे. वहां उन्होंने उस जगह को देखा जहाँ हिन्दु औरतों की नीलामी हुई थी. उस स्थान पर मुसलमानों ने एक स्तम्भ बना रखा है. जिसमे लिखा है- 'दुख्तरे हिन्दोस्तान, नीलामे दो दीनार'. अर्थात इस जगह हिन्दुस्तानी औरतें दो-दो दीनार में नीलाम हुई. उस समय तो यह सब बाते समझ नही आई पर आज उस वाक्य के बारे में जानने की इच्छा हुई. खोजने पर पता चला कि - महमूद गजनवी ने हिन्दुओं को अपमानित करने के लिये अपने 17 हमलों में लगभग 4 लाख हिन्दु औरतें पकड़ कर गजनी उठा ले गया. महमूद गजनवी जब इन औरतों को गजनी ले जा रहा था तो वे अपने भाई, और पतियों से बुला-बुला कर बिलख-बिलख कर रो रही थी. और अपने को बचाने की गुहार लगा रही थी. लेकिन करोडो हिन्दुओं के बीच से मुठ्ठी भर मुसलमान सैनिकों द्वारा भेड़ बकरियों की तरह ले जाई गई. रोती बिलखती इन लाखों हिन्दु नारियों को बचाने न उनके पिता आये, न पति न भाई और न ही इस विशाल भारत के करोड़ो हिन्दु. उनकी रक्षा के लिये न तो कोई अवतार हुआ और न ही कोई देवी देवता आये. महमूद गजनवी ने इन हिन्दु लड़कियों और औरतों को ले जाकर गजनवी के बाजार में समान की तरह बेंच ड़ाला.
संसार की किसी कौम के साथ ऐसा अपमान नही हुआ. जैसा हिन्दु कौम के साथ हुआ. और ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि वह सोचते हैं कि जब अत्याचार बढ़ेगा तब भगवान स्वयं उन्हें बचाने आयेंगे परन्तु इतिहास से सबक लेते हुये हिन्दुओं को समझ लेना चाहिये कि भगवान भी अव्यवहारिक अहिंसा व अतिसहिष्णुता को नपुसंकता करार देते हैं. क्योकि भगवान ने अपने सभी अवतारों में यही संदेश दिया है कि अपनी रक्षा स्वयं करों. तुम्हारी आँखे मैने आगे दी हैं गलत का विरोध करो. पीछे मै सदैव तुम्हारे साथ खड़ा हूँ. परन्तु अत्याचारियों का मुकाबला किये बिना, उनके द्वारा मर जाना, स्वर्ग का रास्ता न होकर नरक का रास्ता है. याद रखो-
यह गाल पिटे वह गाल बढ़ाओ, यह तो आर्यो की नीति नही
अन्यायी से प्रेम अहिंसा यह तो गीता की निति नही
हे राम बचाओ जो कहता है, वह कायर है खुद अपना हत्यारा है.
जो करे वीरता अति साहस वही राम का प्यारा है.

Tuesday, January 31, 2012

काफ़िर हिन्दुओं को अल्लाह की चेतावनी

मुसलमानों के धर्म इस्लाम का मानना है कि अल्लाह ने पैगम्बर मुहम्मद साहब के माध्यम से एक किताब आसमान से भेजी, जिसका नाम कुरान है. कुरान में अल्लाह ने मुसलमानों के लिये आदेश भेजे हैं कि उन्हें क्या करना चाहिये और क्या नही करना चाहिये तथा काफ़िरों के लिये चेतावनी भेजी है कि वह बहुदेववाद अथवा मूर्तिपूजा अर्थात् बुतपरस्ती छोड़ कर मुसलमान बन जायें, नहीं तो उनको भयानक कष्टों और अपमानों को झेलना पड़ेगा. अल्लाह काफ़िरों को यह कष्ट तथा अपमान पहले मुसलमानों के हाथों से दिलवायेगा. कुरान में अल्लाह के आदेश है की यह काफ़िर या मुसलमान बना लियें जायें अथवा मार ड़ाले जायें. लेकिन जो किसी कारण वश जिन्दा बच जायें, तो उनकी जान बचाने के बदले उनसे जजिया कर वसूल किया जाये, उन्हें हर प्रकार से कुचल कर रखा जाये और अपमानित कर कष्ट दिये जायें. कुरान में अल्लाह के यह आदेश आयतों के रुप में समय-समय पर मुहम्मद साहब के माध्यम से उतरते रहे. मुसलमानों की एक धार्मिक पुस्तक कुरान है, जिसमे उपदेश न होकर, अल्लाह के आदेश हैं. जिनकी मुसलमानों द्वारा अवहेलना नही की सकती. इस्लाम का अर्थ ही है ' अल्लाह के आदेशों के सामने समर्पण'

मुठ्ठी भर मुसलमानों ने चटा दी हिन्दुस्तान को धूल

मुठ्ठी भर मुसलमानों ने चटा दी हिन्दुस्तान को धूल इस्लाम के अनुसार हिन्दुओं का सबसे बड़ा दोष यह है कि वह काफ़िर हैं. इसलिये इस्लाम के अनुसार काफ़िरों के लिये सिर्फ़ दो ही रास्ते हैं. या तो वे मुस्लमान बन जायें अथवा जलील करके मार ड़ाले जायें. कुरान मजीद में अल्लाह के इन्हीं आदेशों को मानकर मोहम्मद बिन कासिम ने सन् 712 में सिन्ध के राजा को मारकर हिन्दुस्तान की बरबादी की नीव रखी. जिससे प्रेरित होकर महमूद गजनवी ने 17 बार लाखों हिन्दुओं को मारा काटा. सोमनाथ मंदिर को लूटते और तोड़ते समय 50,0000 हिन्दुओं की हत्या की. (जिसका कारण हिन्दुओं की कायरता और जरुरत से ज्यादा अन्धविश्वास था. वह हिन्दु यही सोचते रहे की भगवान उन्हें धरती पर बचाने आयेगा इसिलिये उन्होंने कातिलों का सामना नही किया और मूली-गाजर की तरह काट ड़ाले गये. यदि उसी समय हिन्दुओं ने उन मुल्लों का डट कर सामना किया होता तो इतिहास कुछ और होता) महमूद गजनवी और उसके सैनिकों ने सोने और हीरे जवाहरातों से ढ़के हुये शिवलिंग को तोड़ दिया.. लूट-पाट मचाई और अपने सैनिकों के साथ मौत का ऐसा तांड़व खेला की सारा सोमनाथ शहर वीरान हो गया. सन् 1122 में मुहम्मद शहाबुद्दीन गोरी ने तराइन के मैदान में पृथ्वीराज चौहान की हत्या करके मौत का तांड़व खेला (इसमें में मुझे पृथ्वीराज चौहान की अदूरदर्शिता ही दिखती है. अगर पृथ्वीराज चौहान ने पहली बार में ही गोरी का सफ़ाया कर दिया होता तो पक्का इतिहास कुछ और होता. तो फ़िर कोई मुल्ला जल्दी से हिन्दुस्तान की तरफ़ नजर उठाने की हिम्मत न करता) मोहम्मद गोरी का साथ देने वाला जयचन्द भी गोरी के ही हाथों मारा गया. मुहम्मद गोरी की अगुआई में मुसलमानों ने कन्नौज से लेकर बनारस तक को लूटा और साथ-साथ हिन्दुओं का कत्लेआम किया. राजा जयचन्द्र की एक पत्नी सुहागदेवी ने मोहम्मद गोरी का साथ दिया था. बदले में गोरी ने सुहाग देवी से वादा किया था कि युद्ध जीतने के बाद वह उसके पुत्र को कन्नौज का राजा बना देगा. जब मोहम्मद गोरी जयचन्द्र का राज्य कन्नौज जीतकर हिन्दुओं को मारता, काटता, लूटता बनारस पहुँचा, तो शहर के फ़ाटक पर अपने पुत्र के साथ सुहाग देवी ने मोहम्म्द गोरी का स्वागत करते हुये अपना परिचय दिया. गोरी ने सुहादेवी को कैद कर लिया और उसके पुत्र को राजा बनाने के स्थान पर मुसलमान बना दिया. मुहम्मद गोरी के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश,बलबन, अलाउद्दीन खिलजी,फ़िरोजतुगलक,सिकन्दर लोधी,तथा बाबर से लेकर औरंगजेब,अहमदशाह अब्दाली आदि बादशाहों ने हिन्दुओं का भयंकर कत्लेआम किया. सन् 1316 में तैमूर लंग कैदी बनाये गये. लगभग एक लाख हिन्दुओं को कुछ ही घंटों में मौत के घाट उतार दिया गया तथा दिल्ली से लेकर हरिद्वार तक अपने घोड़े दौड़ाये, रास्ते में पड़ने वाली हिन्दु बस्तियाँ लूट ली गयी. सन् 1731 में नादिरशाह ने दिल्ली में पाँच घंटे में डेढ़ लाख हिन्दु गाजर, मूली की तरह कटवाकर फ़ेंकवा दिया. सन् 1556 में पानीपत के मैदान में अकबर से जब हेमू (हेमचन्द्र) हार गया तो बैराम खाँ हेमू को पकड़कर अकबर के सामने लाया और अकबर से कहा कि जहाँपनाह अपनी तलवार से इस काफ़िर हिन्दु का सिर धड से अलगकर आप गाजी की उपाधी धारण करें. अकबर ने अपनी तलवार से हेमू का सिर काटकर गाजी की उपाधी धारण की. औरंगजेब ने गोकुल जाट के सिर और धड के टुकडे-टुकडे करके चील, कौवों को खाने के लिये आगरे की कोतवाली के चबूतरे पर फ़ेंकवा दिया. गोकुल जाट के पूरे परिवार को तथा उसके हजारो साथियों को जबरदस्ती मुसलमान बना लिया गया. औरंगजेब ने शिवाजी के पुत्र शम्भा की आखें निकलवा ली और शम्भा जी के शरीर के टुकड़े-टुकड़े करके कुत्तों को खिलवा दिया. औररंगजेब ने हिन्दुओं को बड़ी क्रूरता से कुचल दिया. हिन्दुओं की रक्षा करने वाले गुरु तेग बहादुर सिंह की हत्या करवा दी. गुरु गोविन्द सिंह के दो पुत्रों की हत्या करवा दी और दो को जिन्दा ही चुनवा दिया. बाद में गुरु गोविन्द सिंह की हत्या भी एक मुसलमान पठान ने कर दी. गुरु गोविन्द सिंह के शिष्य बंदा बैरागी को बादशाह फ़रुखशियार ने गिरफ़्तार करवा कर मुसलमान बन जाने को कहा. जब बंदा बैरागी ने मुसलमान बनना स्वीकार नही किया तो बंदा बैरागी और उनके सैकडों सैनिकों का बड़ी बेरहमी से कत्ल कर दिया गया. मतिराम को आरे से चिरवाया गया, कुछ को खोलते तेल में ड़ालकर मारा गया तथा कई रुई के बंड़ल में लपेटकर जला दिया गया. सिख गुरुओं पर भयंकर जुल्म किये गये. वास्तव में यह सभी बादशाह केवल कुरान मजीद के आदेशों का पालन कर रहे थे.. और यह कोई मुल्लों शौर्य की गाथा नही हिन्दुओं की बेवकूफ़ी, कायरता, अंधविश्वास और अत्यधिक दयालुता वाले स्वभाव की गाथा है. हिन्दुओं के साथ इतनी त्रास्दी होने के बाद भी हिन्दुओं ने अपने इतिहास से कोई सबक नही लिया. अगर आज भी हिन्दु नही समहले और ये ऊँच-नीच जैसे ढ़कोसलों को मानते हुये अपने धर्म के उदासीन बने रहेंगे तो वह समय दूर नही जब हिन्दुस्तान फ़िर से मुल्लास्थान बन जाये... इसलिये मेरा हिन्दुओं से आग्रह है की अब तो जागो और हिन्दु एकता को बढ़ावा दो.गर्व से बो ले हम एक है. किसी चमत्कार की उम्मीद न करें की भगवान आपको बचाने आयेगा. जान लो भगवान भी उसी का साथ देता है जो खुद अत्याचार का सामना करने के लिये आगे आता है. आत्म रक्षा ही सबसे बड़ा धर्म है. इसी उद्देश्य से निकाल दो हिन्दु समाज से शूद्र या दलित जैसे शब्द. भूल जाओ अव्यवहारिक अहिंसा को. मिटा दो अतिसहिष्णुता को और गर्व से बोलों हम हिन्दु हैं.. यह गाल पिटे वह गाल बढ़ाओ, यह तो आर्यों की नीति नही अन्यायी से प्रेम अहिंसा, यह तो गीता की नीति नही हे राम बचाओ जो कहता है, वह कायर है, खुद अपना हत्यारा है जो करे वीरता अति साहस वही राम का प्यारा है.

कब्र..मजार.. या दरगाह पूजने से ही होगी धार्मिक एकता....

कब्र..मजार.. या दरगाह पूजने से ही होगी धार्मिक एकता.... मनहूस सेकुलर नेता मज़ारो (कब्रों) को खूब भुनाते हैं. मुसलमानों की कब्र जिसे मजार अथवा दरगाह कहते हैं, मे मुसलमानों से अधिक हिन्दु जाते हैं जिसके लिये मनहूस सेकुलर नेता प्रचार करते हैं कि यह हिन्दु मुस्लिम एकता का महान उदाहरण है. इन मजारो को हिन्दु मुस्लिम एकता का प्रतीक कहकर हिन्दुओं को उनमें चादर चढ़ाते दिखाया जाता है. लेकिन यह नेता हिन्दु मंदिरों में मुसलमानों से पूजा करवाकर हिन्दु-मुस्लिम एकता का उदाहरण क्यों नही पेश कराते. क्या यह ऐसा कर सकते हैं? उत्तर केवल एक है कि हरगिज नही. फ़िर यह एकतरफ़ा हिन्दु-मुस्लिम एकता की बात क्यों की जाती है? श्रीजवाहर लाल नेहरु, महात्मा गांधी, इन्दिरा गांधी, डा. राजेन्द्र प्रसाद आदि की समाधि पर उनकी पुण्यतिथि को गीता, कुरान आदि सभी धर्मो की पुस्तकों का पाठ होता है. लेकिन जाकिर हुसैन, मौलाना आजाद, फ़खरुद्दीन अली अहमद आदि मुसलिम नेताओं की मजार पर केवल कुरान का पाठ होता है. वहाँ यह नेता गीता का पाठ क्यों नही करवाते? क्या धर्मनिरपेक्षता और दूसरे धर्मो की इज्जत करने का ठेका केवल हिन्दुओं ने ही ले रखा है? अजमेर सहित भारत की अन्य दरगाहों व मज़ारों में हिन्दु कुत्ते की तरह दौड़े चले जाते हैं. अपने बच्चों को मस्जिदों में ले जाकर फ़ूंक मरवाते हैं. ऐसे हिन्दु दरगाहों मज़ारों और पीर फ़कीरों और बाबाओं के नाम से थरथर काँपते हैं. हिन्दु जिस धर्म को मानते हैं, वह अपरिभाषित है. इसलिये संकट के समय ईश्वर हिन्दुओं का साथ नही देता, इतिहास गवाह है. हिन्दुओं की यह मज़ार परस्ती (मज़ार पूजना) हिन्दु-मुस्लिम एकता का नमूना न होकर, उनकी अज्ञानता और मूर्खता है. हिन्दु धर्माचार्यों को उन्हें ऐसा करने से रोकना चाहिये. खबरदार ! यह मज़ार और बाबा पूजा बन्द करो. उस परमपिता परमेश्वर की पूजा करो, जो सबको देता है. जिसकी मजार मे तुम जाते हो अथवा अवतार के नाम पर जिस बाबा की तुम पूजा करते हो, उसे परमेश्वर ने ही पैदा किया और परमेश्वर ने ही जब चाहा उसे मार दिया. उसको अपने जिन्दा रहते जो कुछ भी मिला, परमेश्वर से ही मिला. अनन्त सूर्यों, अनन्त अनन्त ब्रह्माण्ड़ को उत्पन्न करने वाला, उन्हें प्रकृति के नियम में बाँधकर निश्चित गति देने वाला तथा उनका विनाश करने वाला, प्रकाश की गति से अनन्त गुणा गति दे सकने वाला वही परमपिता परमेश्वर ही है. उसकी इस अनन्त महान रचना के सामने, हम क्या? हमारी पृथ्वी ही लगभग शून्य के समान है. इसलिये जो भी मांगना है उस परमपिता परमेश्वर से ही मांगो. देना अथवा न देना तुम्हारे कर्म और उसकी इच्छा पर निर्भर है. गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि भूत प्रेत, मूर्दा (खुला या दफ़नाया हुआ अर्थात् कब्र अथवा समाधि) को सकामभाव से पूजने वाले स्वयं मरने के बाद भूत-प्रेत ही बनते हैं. यान्ति देवव्रता देवान् पितृन्यान्ति पितृव्रताः भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपिमाम्.

हिन्दुओं का मूर्खतापूर्ण पलायनवाद

हिन्दुओं का मूर्खतापूर्ण पलायनवाद आजकल कुछ पलायनवादी हिन्दु कहते हैं कि हिंसावादी लोग आपस में ही लड़कर मर जायेंगे. कुछ कहते हैं कि उनसे अमेरिका निपट लेगा और कुछ कहते है कि लागे सम्बद बीसा, न रहे ईसा न मूसा. इसी तरह गुजरात में सोमनाथ मंदिर में पुजारियों ने अंधविश्वास फ़ैला रखा था कि मंदिर में मुस्लमान सैनिकों के पैर रखते ही, भगवान शिव क्रोध से अपना तीसरा नेत्र खोल देंगे और सारे मुस्लमान जलकर भस्म हो जायेंगे. लेकिन जब सोमनाथ मंदिर पर वास्तव में महमूद गजनवी का हमला हुआ, तो मंदिर की सुरक्षा के लिये लगाये गये हजारों सैनिक, इसी अंधविश्वास के कारण मंदिर की रक्षा के लिये लड़ने के स्थान पर अपने-अपने हथियार मंदिर में ही रखकर दीवारों और छतों पर यह देखने के लिये चढ़ गये कि भगवान शिव जब क्रोध से अपना तीसरा नेत्र खोलेंगे, तब मुसलमान सैनिक कैसे तड़प-तड़पकर मरेंगे. इतिहास गवाह है कि विरोध न होने के कारण महमूद गजनवी के आतंकवादी सैनिक तो सुरक्षित रहे, किन्तु अन्धविश्वास के नाम पर अकर्मण्यता फ़ैलाने वाले सैकड़ो पुजारियों व तमाशा देखने वाले हजारो हिन्दु सैनिकों को मार-काटकर, संसार के सबसे वैभवशाली मंदिर सोमनाथ को महमूद गजनवी ने मिट्टी में मिला दिया और लगभग 500000 हिन्दुओं को मार-काटकर सारा शहर सोमनाथ वीरान कर दिया. भाग्य और भगवान के सहारे बैठे रहने के कारण हिन्दु सदैव इसी तरह खतरों में पड़ते रहे.